उत्सव
>> गुरुवार, 1 जनवरी 2009
इसका चक्र तो चलता रहता
इसके चक्रो में मस्ती है
मस्ती में ये बहता रहता
क्यों करे इस टोली में
कोई कल की चिंता
चिंता होती एक चिता
मस्ती होती जीवन माला
कोई देवालय में जाए
कोई जाए मयखाना
इस बात से फर्क न पड़ता
मस्ती ही दोनों की भाषा
मैं न जानूं तर्क वितर्क
मस्ती मेरे ह्रदय का सत्य
ये परे है तर्कों से
मस्ती मेरे ह्रदय का पथ
मस्ती उल्लास की जननी
मस्ती उत्सव की माता
जब अधरों पर मुस्कान आए
मस्ती सृष्टि में छा जाए
मेरे प्रियतम !! मेरे हमजोली !!
मुस्कान अधरों पर सजा ले
मस्ती उत्सव मना ले



















