मस्ती स्पंदन

>> मंगलवार, 15 जुलाई 2008


मस्ती मेरा तिलक
मस्ती ही मेरा चंदन
मस्ती मेरा मनका
मस्ती ही भजन

भाल पर भभूत
मस्ती
गले की माला भी
मस्ती

मस्ती जीवन दर्शन है
मस्ती जीवन स्पंदन है

मस्ती के इन
प्रतीकों को
अपने ह्रदय लगाओ
मस्ती के इस
मार्ग पर तुम भी
जाओ

मेरे प्रियतम ! मेरे हमजोली!!
आओ लगा ले
भाल पर हम
मस्ती की रोली
मस्ती के मनको
को फेरे मिलकर हमजोली

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मस्ती की बारिश

>> बुधवार, 2 जुलाई 2008



मस्ती तो बारिश की जैसी
रिमझिम रिमझिम बरसती जाए
मस्ती की बूंदों को पाकर
जीवन खिलता जाए

जीवन था तब तक मरुस्थल
जब तक इसमे मस्ती न आई
मस्ती की बारिश को पाकर
जीवन की बगिया खिल आई

मस्ती जीवन को मुस्काती है
मस्ती जीवन को अपनाती है
मस्ती के इन धारों में
मेरे प्रियतम ! मेरे हमजोली
तुम भी आओ

भीगी भीगी इस मस्ती में
तुम भी भीगते जाओ
ईश प्रसन्न है ,आज मगन है

मस्ती की बारिश का
अवसर शुभ सगुन है
भीगी भीगी इस मस्ती में
मेरे प्रियतम ! मेरे हमजोली
तुम भी आओ

आओ मिलकर हम सब बनाये
मस्ती का ये उत्सव
मस्ती बरस रही है
आज बनकर जीवन का उत्सव !!

जीवन के इस उत्सव में
तुम भी आओ
मेरे प्रियतम ! मेरे हमजोली!!

आओ बनाये मिलकर हम
मस्तों की इक टोली
जीना जिसकी भाषा हो
और हँसना हो बोली .



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जीवन गुंजन

>> शनिवार, 14 जून 2008


मस्ती में डूबा
हर छण पावन है
जीवन का रोपण है
मस्ती ।

जीवन का गुंजन है मस्ती
जीवन का यह नाद
जीवन का आधार है मस्ती
परम ईश का यह प्रसाद

मस्ती तो एक सुधा है
जीवन की यह वसुधा है
जीवन का गौरव है मस्ती
जीवन पुष्प का सौरभ मस्ती

मस्ती के पौधे को रोपो
इसको पालो इसको सींचो
इसका पौधा वृक्ष बनेगा
नए जीवन की छांव बनेगा

इस लोक से उस लोक तक
मस्ती रस को फैला दो
परम ईश को भी अब
मस्ती का भोग लगा दो

फ़िर वहां से जब कोई आएगा
मस्ती रस को संग लाएगा
फ़िर जो यहाँ से जाएगा
मस्ती रस को ही ले जाएगा

मस्ती को सूत्र बनाओ
प्रभु से जुड़ जाने का
मस्ती को मंत्र बनाओ
प्रभु को मनाने का

मस्ती के वट वृक्ष की
इस शीतल छाँव में
तुम भी आओ
मेरे प्रियतम ! मेरे हमजोली!!

आओ बनाये मिलकर हम
मस्तों की इक टोली
जीना जिसकी भाषा हो
और हँसना हो बोली .

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मस्ती भगवन

>> बुधवार, 4 जून 2008

अब बैचैनी नही है मन में
जब से मस्ती जीवन में आई
मस्ती के संग संग फिरने से
मस्ती में खुशियाँ ही पाई

मस्ती में मिला दर्शन
मस्ती में मिला भगवन
भगवन का अवतार है मस्ती
भगवन का प्रसाद है मस्ती

अब बैचैनी नही है मन में
जब से मस्ती जीवन में आई
मस्ती के संग संग फिरने से
मस्ती में खुशियाँ ही पाई

जो मस्ती की राह पकड़ता
दुःख कोई फ़िर जकड़ता
मस्ती में बहता ही जाए
फ़िर जीवन का डोला

मस्ती रस में झूम झूम
फ़िर मन ये बोला
मस्ती ही मेरा मौला है
मस्ती ही मेरा चोला
मस्ती ही मेरा डेरा है
मस्ती ही जीवन का मेला

अब बैचैनी नही है मन में
जब से मस्ती जीवन में आई
मस्ती के संग संग फिरने से
मस्ती में खुशियाँ ही पाई

मस्ती ही धाम प्रभु का
मस्ती ही है प्रभु का नाम

मेरे
प्रियतम !! मेरे हमजोली
आओ बनाये मिलकर हम
मस्तो की एक टोली
जीना जिसकी भाषा हो
और हँसना हो बोली



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मस्ती जीवन की माला

>> मंगलवार, 13 मई 2008

मस्ती जीवन की है माला
मस्ती जीवन का अमृत प्याला
इस अमृत का जिसने पान किया
धन्य हुआ उसका जीवन
उसे ईश का वरदान मिला

मस्त हो जाता जब जीवन
लयबद्ध हो जाता है
रोज़ नयी नयी राहों पर
जीवन चलता जाता है

मस्ती गति है जीवन की
मस्ती रंग है जीवन का
जीवन के इस मूलमंत्र को
अपने हृदय लगाओ

मस्तो की टोली मे
मेरे प्रियतम !! मेरे हमजोली
तुम भी आओ !!

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जीवन बहता जाए

>> मंगलवार, 29 अप्रैल 2008

मस्ती मे जब मन रम जाए
जीवन फ़िर बहता ही जाए
मस्ती से खिल जाए जीवन सुमन
मस्ती मे मिल जाए भगवन

जीवन फ़िर गाता ही जाए
मस्ती मे जीवन खिलता जाए
जीवन फ़िर बहता ही जाए

मस्ती से मिट जाए चिंता की लकीरे
मस्ती से संवार जाती तकदीरें
मस्ती से सुरभित होता
जीवन का कोना कोना
मस्ती शब्द है सोना

हृदय की पुकार को सुनो
मस्ती से जुड़ जाओ
ये आमंत्रण नए जीवन का
मस्तो ** की सोहबत मे चले आओ

जीवन का सार है मस्ती
जीवन के पार है मस्ती
एक पूर्णता है मस्ती
एक दिशा है मस्ती

मस्ती मे जब मन रम जाए
जीवन फ़िर बहता ही जाए
मस्ती से खिल जाए जीवन सुमन
मस्ती मे मिल जाए भगवन

मस्तो की टोली मे आओ
मेरे प्रियतम! मेरे हमजोली !!
आओ बनाये मिलकर हम
मस्तो की टोली
जीना जिसकी भाषा हो
ओर हँसना हो बोली

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जीवन का सार है मस्ती

>> शनिवार, 19 अप्रैल 2008

अनहद गूंजे मस्ती मे
अमृत छलके मस्ती मे
एक योग है मस्ती
एक जोग है मस्ती

मस्त होकर ही रोज़ सुबह
सूरज दस्तक देता है
मस्त निशा मे ही तो
चांद शीतलता देता है

मस्ती स्वभाव है इस कुदरत का
मस्ती भाव है इस जीवन का

बस केवल मस्ती को पकडो
मस्ती की राह से जुड़ जाओ
जीवन का उत्सव है मस्ती
जीवन का गीत झूम झूम गाओ

दो छोर के बीच मे जीवन
आदि पता न अन्त
ढूँढा करते इस रहस्य को
जाने कितने संत ?

दो छोर के बीच है जीवन
पल पल इसका जीते जाओ
मस्तो**की मदिरा है ये
प्रेम से पीते जाओ

खाली हाथ न कोई आता
खाली हाथ न कोई जाता
मस्ती लेकर साथ है आता
मस्ती लेकर साथ है जाता !!

जिस आँगन में फूल खिला है ,
धूप खिली है , मन धुला है .
उस आँगन में तुम भी आओ !
मेरे प्रियतम मेरे हमजोली!!
आओ बनाये मिलकर हम ,
मस्तो की टोली.......

जीना जिसकी भाषा हो .
और हँसना हो बोली !!

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मस्ती का वरदान

>> मंगलवार, 15 अप्रैल 2008

अपने हृदय की गांठ तो खोलो
फिर देखो आनंद बरसता है
मस्ती को पाने की खातिर
मानव जीवन तरसता है ।

धन्य हुआ उनका जीवन
जिनको मस्ती का वरदान मिला
जीवन जिया फिर मस्ती मे
मस्ती मे ही दुनिया को विदा कहा ।

एक प्रवाह है मस्ती
गतिमान धारा है मस्ती
इस धरा पे वरदान है मस्ती
उस लोक का वरदान है मस्ती

मस्ती को जिसने अपनाया है
उसने कभी फिर कुछ न खोया
मस्ती मे पाया ही पाया
मस्ती मे नाचा ही नाचा .

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मस्ती का जादू !!

>> शुक्रवार, 22 फ़रवरी 2008

शायद मस्ती का यही जादू भी है की जब कोई काम आप जीवन में हसते हुए गाते हुए और नाचते हुए करते हैं . तोजीवन प्रार्थना नज़र आने लगता है. "मस्तो" ने कभी भी स्वयं को जीवन की जटिलता में नही बांधा बल्कि खुद केभीतर के शिशु को हमेशा जीवित रखा. मस्तो की मुस्कान सहज थी . इसलिए उनसे जो भी मिला बस उनका ही हो गया .मस्तो कहते थे की अपने भीतर जो बच्चा है ,उससे रूबरू हो जाना ही वास्तव में अध्यात्म है. . और यहीजीवन की खुशी भी है . मस्तो की टोली का कांसेप्ट जीवन को प्रकाशित करना है ," बाह्य आभा" से नही वरनआतंरिक आभा" से . मस्ती जीवन का एक राग है, जीवन के लयबद्ध होने की घटना है . मस्तो मानवता अब मस्तहोने को है . मस्तो की टोली प्यारे प्रभु मस्तो और मस्ती का आराधन है !! मेरे एक मित्र पूछते है क्या मस्तो कीटोली कोई संप्रदाय है ? मस्तो की टोली किसी गुरु , किसी तरह के वाद नियमो कायदों से परे है .... ये केवल औरकेवल अपने आप से रूबरू होने का प्रयोजन है ... इसके बाद और पहले कोई भी आडम्बर नही है. मस्ती में गाती परवाज , बहते जल , बहती हवा की तरह यह भी एक स्वभाविक सी क्रिया है. जिस दिन हम अपने आप से मिलजायंगे मस्ती खुदबखुद घटने लगेगी .और जिंदगी मस्त हो जायगी उत्सव की तरह !!

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मस्ती की राह

अर्पित पुष्प ! मस्तो तुमको मैं
मस्ती में झूम झूम करता हूँ
पुण्य उदित हुआ मेरा अब
मस्ती की राह पकड़ता हूँ .

आज लगी है धरती गाने
आज मिले हैं नए ठिकाने ।
आज पुण्य उदित हुआ है
मस्ती का रस मिला है
जाग उठी आत्मा
मिल गया परमात्मा !!

मैं नाच रहा मस्ती में
डूब डूब
इस सुनहरी धूप को
चूम चूम !!

अर्पित पुष्प ! मस्तो तुमको मैं
मस्ती में झूम झूम करता हूँ
पुण्य उदित हुआ मेरा अब
मस्ती की राह पकड़ता हूँ ।


पहले था मैं अस्त व्यस्त
अब मैं हूँ बस मस्त मस्त !!

जीवन जागा पुण्य प्रताप से
डर नहीं मृत्यु का आज से
जीवन के इस राग में
बह जाना है झरना बनके
जीवन के इस आसमान में
उड़ जाना है बादल बनके

संवर रहा जीवन मस्ती में
मस्ती में ही विस्तार मिला है
जीवन की जय
मृत्यु का क्षय !!

अर्पित पुष्प ! मस्तो तुमको मैं
मस्ती में झूम झूम करता हूँ
पुण्य उदित हुआ मेरा अब
मस्ती की राह पकड़ता हूँ ।

सुबह होती दिखती है
कायनात गाती सी लगती है
मस्ती में चाँद भी फलक पर
मस्तो तेरे ही गीत गाता है
रोज़ सवरे मस्त होके
सूरज मेरी खिड़की पे आता है !!

अर्पित पुष्प ! मस्तो तुमको मैं
मस्ती में झूम झूम करता हूँ
पुण्य उदित हुआ मेरा अब
मस्ती की राह पकड़ता हूँ ।

मेरे बंजारे जीवन में
मस्ती की झंकार
पायल पहने गोपाला भी
मस्ती में अब मतवाला!!

अर्पित पुष्प ! मस्तो तुमको मैं
मस्ती में झूम झूम करता हूँ
पुण्य उदित हुआ मेरा अब
मस्ती की राह पकड़ता हूँ ।
(प्यारे मस्तो! जीवन को उत्सव बनाने का जो मंत्र तुमने दिया शुक्रिया शुक्रिया )

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जब हुआ मैं अस्त

>> सोमवार, 21 जनवरी 2008



जब हुआ मैं अस्त तो जागी मस्ती
मैं रहा तो नही थी मस्ती .
खुद को भुलाया तो मिली मस्ती !!
मस्ती से मिलकर बदली मेरी हस्ती .

जीवन गरल था और जटिल था
पर मस्तो संग तेरा पाके
मस्ती सुधा का पान किया
अब जीवन है सहज सरल
अब जीवन है सहज सरल.

सच कहते है ज्ञानी ध्यानी
बनके भी क्या हासिल होगा
सहजता सार है इस जीवन का
सहज ही इसकी बोली
मस्तो जीवन बन रहा
अब मस्तो की टोली.

एक उत्सव है !
एक आनंद है !!
मस्ती सार इस जीवन का .

प्यारे मस्तो तुमने ही
शुभ मार्ग पर हमे प्रशस्त किया
राह दिखाई मस्ती की
और ये जीवन मस्त किया !!!

अब जीवन है धन्य
मस्ती का धान्य इसमे पूरा
पूर्ण हुआ जीवन मेरा
मिला मस्तो का डेरा .


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मस्ती जीवन की अभिलाषा



मस्तो ने कहा है ....
जीवन जीना मस्ती में ,
मस्ती में ही भगवान मिलेगा .
मुक्ति मिलेगी मस्ती में ....
मस्ती मेरे मनके हैं
और मस्ती ही मेरी माला
मैं जपता दिन रात बस
मस्ती की ही माला .
मस्ती मेरा पथ हैं
और मस्ती ही मेरी अभिलाषा .

मस्त हुआ जीवन मेरा
मस्तो तेरा साथ मतवाला !!
(प्यारे प्रभु मस्तो को अहोभाव से अर्पित !!)

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आमंत्रण




जिस आँगन में फूल खिला है ,
धूप खिली है , मन धुला है .
उस आँगन में तुम भी आओ !
मेरे प्रियतम मेरे हमजोली!!
आओ बनाये मिलकर हम ,
मस्तो की टोली.......

जीना जिसकी भाषा हो .
और हँसना हो बोली !!

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